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Showing posts from July, 2020

राम ही राम हैं

राम ही राम हैं NAVNEET ।।  राम ही राम हैं   ।। राम ही राम हैं राम जी महान हैं पल चाहे जैसा भी राम आते काम हैं राम की महानता राम की उदारता राम जी का प्रेम है राम जी ही एक हैं मन में है राम राम तन में है राम राम राम ही बनाते हैं बिगड़े सारे काम राम जी ही नेक हैं राम जी ही श्रेष्ठ हैं राम जैसा कोई न पुरुषोत्तम राम हैं - नवनीत

कुछ कलम बिकते हैं

कुछ कलम बिकते हैं NAVNEET ।।  कुछ कलम बिकते हैं   ।। लिखने वाले भी, जानते हैं सच्चाई क्या है बस लिखना है इसलिए लिखते हैं हर कलम में मर्यादा नहीं होती कुछ कलम ऐसे भी हैं जो बिकते हैं - नवनीत

राम सृष्टि के कण-कण में

राम सृष्टि के कण-कण में NAVNEET ।।  राम सृष्टि के कण-कण में   ।। राम सृष्टि के कण-कण में है धरती में है गगन में है राम बिना, हर काम अधूरा राम दिल में है, राम मन में है जग में करना होगा कोई काम शुरू करो ले राम का नाम संकट हर ले जाएंगे कार्य सिद्ध कराएंगे कर्म के द्योतक है राम राम बिना ना हो कोई काम - नवनीत

नींद ही सत्य है

नींद ही सत्य है NAVNEET ।।  नींद ही सत्य है   ।। नींद ही सत्य है जीवन के हर काल का नींद ही सत्य है जीवन के हर हाल का नींद जो पूर्ण है होती रहता मन को भी आराम है मस्तिष्क को न कोई झंझट काम करता सुबह शाम है नींद अपनी पूरी करो चाहे जितना भी हो काम नींद ही श्री कृष्ण है नींद ही श्री राम - नवनीत

जब ज़िन्दगी नाराज़ हो

जब ज़िन्दगी नाराज़ हो NAVNEET ।।  जब ज़िन्दगी नाराज़ हो   ।। जब ज़िन्दगी नाराज़ हो उदासी का मन पर राज़ हो सूझता हो कुछ नहीं और खाना भी बेस्वाद हो लाइए चटकारे उनमें मन की बातों को विचार दीजिये जिस कार्य में लगता हो मन बस वहीँ कार्य कीजिये ज़िन्दगी में खाने सा गर्म-मीठा सॉस डालिये बेस्वाद सा भी भोजन को एक नया स्वाद दीजिये - नवनीत

दर्द भी सिखाता है

दर्द भी सिखाता है NAVNEET ।।  दर्द भी सिखाता है    ।। दर्द भी सिखाता है जीने की कला, जीवन में दर्द हो जो, मन देता है सलाह। कैसी भी हों परिस्थितियां, करें उनका सामना, किसी भी हाल में, हार मत मानना। ज़िंदगी फिर आएगी, लेकर नई रौशनी। पूरी हो जाएगी, आपकी हर कमी। - नवनीत

अकेलापन

अकेलापन NAVNEET ।।  अकेलापन   ।। अकेलेपन में, मनुष्य का स्वयं से परिचय होता है स्वयं को समझता है स्वयं को परखता है स्वयं की कमी तलाशता है स्वयं में सुधार लाता है अकेलेपन में मनुष्य स्वयं को इंसान बनता है - नवनीत

एक नई दुनियाँ बसाएं

एक नई दुनियाँ बसाएं NAVNEET ।।  एक नई दुनियाँ बसाएं   ।। न सोंचें, न हिचकिचाएं न डरें, न घबराएं आओ, अपनों के साथ अपने विचार वाली प्यार वाली, अपनापन वाली एक नई दुनियाँ बसाएं जहाँ बस प्रेम हो एक दूसरे का कुशलक्षेम हो जहाँ न हो घृणा जलन ऐसी एक दुनियाँ बसाएं हम - नवनीत

आरोही संगीत की तरह

आरोही संगीत की तरह NAVNEET ।।  आरोही संगीत की तरह   ।। जीवन एक राह है इसपर चलते जाना है हो चाहे जैसा भी पल आगे बढ़ते जाना है आशाएं भी होंगी निराशाएं भी होंगी परन्तु एक मधुर गीत की तरह आरोही संगीत की तरह हर पल मुस्कुराना है बस, आगे बढ़ते जाना है - नवनीत

ज़िन्दगी बड़ी अजीब है

ज़िन्दगी बड़ी अजीब है NAVNEET ।।  ज़िन्दगी बड़ी अजीब है   ।। ज़िन्दगी बड़ी अजीब है कभी आपके मन में जो भावनाएं होती हैं उन्हें पड़ाव देती है कभी कभी पर रास्ते में पर कुछ कठिनाई देती है समझ नहीं आता मन क्या करे कठिनाइयों को रोक दे या हमसफ़र बना साथ चले - नवनीत

प्रेम माता पिता का

प्रेम माता पिता का NAVNEET ।।  प्रेम माता पिता का   ।। प्रेम माता पिता का सबसे बड़ा संसार में भूलना न इसको तुम कभी किसी हाल में संतान की प्रसन्नता को हर कर्म करते है स्वयं रह कर न्यूनतम में पालन पोषण करते हैं भूलें न इस प्रेम को खड़ा उतरें विश्वास पर माता पिता से बड़ा नहीँ कुछ है इस संसार में - नवनीत

लालटेन

लालटेन NAVNEET ।।  लालटेन    ।। रौशनी वो लालटेन की जो घर को जगमगाती थी बच्चे उसमें पढ़ते थे माँ भी रोटियाँ बनाती थी लौ भी अपने बस में था साथ ले जाते थे कहीं भी लालटेन मन की भावनाओं सी जलती रहे चलती रहे - नवनीत

एकतरफा प्यार

एकतरफा प्यार NAVNEET ।।  एकतरफा प्यार   ।। उस प्यार का भी न अपना एक मज़ा था माना वो सिर्फ मेरा था माना वो एकतरफा था देखकर उनको , मन खिल उठता था सर्द हो जाती थी हवाएं बड़ा अच्छा लगता था। नज़रें जब उनसे मिलती थी संतोष मिलता था न होश हमें रहता था जब वो मुस्कुराते थे उनकी एक झलक के लिए हम राहों में नज़रों के फूल बिछाते थे - नवनीत

पिता और बेटी

सावन के इस महीनें में नभ पर जो बादल छाए यूँ लगता मेरे वास्ते संदेशवाहक बन कर आए क्या मेरे पिता के घर से ए बादल तुम आए हो बरस कर शीघ्र बतलाओ जो संदेशा पापा का लाए हो बरस जाओ मेरी आँचल में मुझको बाबुल का प्यार दो लाए हो संग आशीर्वाद जो आ झोली में मेरी डाल दो

हार न मानना

हार न मानना NAVNEET ।।  हार न मानना   ।। गर्दिश में है सितारे तो क्या अभी आप हैं हारे तो क्या फिर खड़ा हो हे मनुष्य रास्ते हैं थोड़े उखड़े तो क्या अभी दूर तुझको जाना है पड़ाव अपना पाना है करते चलो कठिनाईयों का सामना हे मनुष्य, हार न मानना - नवनीत

सहारे की ज़रूरत

सहारे की ज़रूरत NAVNEET ।।  सहारे की ज़रूरत   ।। सहारे की ज़रूरत किसे है बस कोई साथ देने वाला चाहिए ज़िन्दगी के हर राह पर बस कोई हाथ पकड़ने वाला चाहिए यूँ भी कट सकता है ज़िन्दगी का सफर बस कोई विश्वास रखने वाला चाहिए - नवनीत

चूड़ियाँ

चूड़ियाँ NAVNEET ।।  चूड़ियाँ   ।। खनकती हैं शोर नहीं मचाती हैं रंग बिरंगी हैं अतः मन को भाती हैं मेरी कलाइयों की गरिमा हैं मेरी सौभाग्य चिह्न हैं ये पहचान हैं मेरी चंचलता की ये परिचायक हैं मेरे स्त्रीत्व की ये केवल गहना नहीं अपितु मेरी अलंकार हैं ये ये चूड़ियाँ हैं ये जब खनकती हैं सबको भाती हैं - नवनीत

संदेश एक सैनिक का

उन राहोँ पर चलना आसान न था पर रुकना हमारा काम न था हमने ली थी शपथ उसको निभाने की इससे बेहतर कोई मुकाम न था त्याग दिए प्राण अपनी भारत माँ के ख़ातिर इससे बेहतर कोई अंजाम न था याद रखना हमें अपनी यादों में हमारे जीवन का और कोई पैगाम न था फिर आएंगे देश की खातिर ये हमारा विराम न था

सूरज की सीख

सूरज की सीख   NAVNEET ।।  सूरज की सीख   ।। दस्तक दे रहा आकाश रखो तुम खुद पर विश्वास ये वक़्त अब मिटेगा की खुशियां फिर से आएँगी ये देखो लालिमा मेरी ये देखो प्यारा मेरा रंग रहो तुम खुश हमेशा हीं यहीं होगा तुम्हारे संग - नवनीत

यूँ ही नहीं चीन काँपा है

यूँ ही नहीं चीन काँपा है NAVNEET ।।  यूँ ही नहीं चीन काँपा है   ।। माहौल उन्होंने भाँपा है यूँ ही नहीं वो काँपा है जब उलटी पड़ी लद्दाख की चाल तब से चीन है बेहाल वो समझ गए आसान नहीं मन में जो बातें पालें है अब सीमाएं सुरक्षित हैं चौकन्ने अपने रखवाले हैं अब देश में भी एक गुस्सा है कोई शांत न रहने वाला है हम पहले प्रेम से जीतते हैं जो न मानो तो ज्वाला हैं हम मानवता पर चलते हैं बस प्रेम से ही पिघलते हैं जो अपनेपन को बांटोगे तब ही अपनापन पाओगे जो फन अपना फैलाओगे तो बाद में फिर पछताओगे - नवनीत