जब ज़िन्दगी नाराज़ हो
NAVNEET
।। जब ज़िन्दगी नाराज़ हो ।।
जब ज़िन्दगी नाराज़ हो
उदासी का मन पर राज़ हो
सूझता हो कुछ नहीं
और खाना भी बेस्वाद हो
लाइए चटकारे उनमें
मन की बातों को विचार दीजिये
जिस कार्य में लगता हो मन
बस वहीँ कार्य कीजिये
ज़िन्दगी में खाने सा
गर्म-मीठा सॉस डालिये
बेस्वाद सा भी भोजन को
एक नया स्वाद दीजिये
- नवनीत
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