पिता और बेटी

सावन के इस महीनें में

नभ पर जो बादल छाए यूँ लगता मेरे वास्ते संदेशवाहक बन कर आए क्या मेरे पिता के घर से ए बादल तुम आए हो बरस कर शीघ्र बतलाओ जो संदेशा पापा का लाए हो बरस जाओ मेरी आँचल में मुझको बाबुल का प्यार दो लाए हो संग आशीर्वाद जो आ झोली में मेरी डाल दो

Comments

Popular posts from this blog

चक्रव्यूह

मित्रता

सफ़र