संदेश एक सैनिक का

उन राहोँ पर चलना

आसान न था पर रुकना हमारा काम न था हमने ली थी शपथ उसको निभाने की इससे बेहतर कोई मुकाम न था त्याग दिए प्राण अपनी भारत माँ के ख़ातिर इससे बेहतर कोई अंजाम न था
याद रखना हमें अपनी यादों में हमारे जीवन का और कोई पैगाम न था फिर आएंगे देश की खातिर ये हमारा विराम न था

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