चूड़ियाँ

चूड़ियाँ

NAVNEET


।। चूड़ियाँ ।।


खनकती हैं शोर नहीं मचाती हैं
रंग बिरंगी हैं अतः मन को भाती हैं
मेरी कलाइयों की गरिमा हैं मेरी सौभाग्य चिह्न हैं
ये पहचान हैं मेरी चंचलता की ये परिचायक हैं मेरे स्त्रीत्व की
ये केवल गहना नहीं अपितु मेरी अलंकार हैं ये
ये चूड़ियाँ हैं ये जब खनकती हैं

सबको भाती हैं

- नवनीत

Comments

Popular posts from this blog

चक्रव्यूह

वो क्षण

सच्चाई