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समय चक्र

बचपन के काटे अल्हड़पन से युवा में जूझते समस्याओं तक चलता रहा जीवन का ये चक्र पल ख़ुशी के ग़म के पल तक हैं सिक्के के दो पहलू दोनों न कोई नदियों का किनारा संग रहते जब तक हैं दोनों है रहता जीवन में उजियारा सफ़र यूं हीं बस चलता जाए आगे यूं बढ़ हम मंज़िल पाएं चाहे उतार चढ़ाव जितने भी समय चक्र बस चलता जाए

उस पल

काश वो एक पल भी आए ए काश वो मंज़र अब आए मिल जाएं किसी मोड़ दोनों बातें जो हैं मन में कह जाएं करूंगा क्या ये सोच रहा हूं अभी तक संकोच में रहा हूं मन की बात कब तक अंदर मिलोगी तुम कर दूंगा बाहर तुमको अपने साथ बिठाकर हवाओं सम मैं उड़ा ले जाऊं विचरण करें तब नदी किनारे संग बैठ उस पल को बिताएं हर खुशियां उस पल में दे दूं थोड़े वक्त में बहुत कुछ दे दूं याद रहे वो पल जीवनपर्यंत छोटा सा पल पर न हो अंत इतना खूबसूरत वो पल हाय चुस्कियों संग एक गरम चाय तुम मुझको देखे मैं तुम्हें देखूं न तू मुझे रोके न मैं तुझे रोकूं बस वहीं पर ये वक्त थम जाए तब मैं तुझसे कुछ कह न पाऊं मेरे मन की बात रहे मन में ही बिन कहे काश समझ तू जाए मैं तुझे बगिया में लेकर जाऊं फूलों से तेरा परिचय करवाऊं बखान करूं उनसे यह सुंदरता कहूं इनके आगे पुष्प तू फीका और इस पल की यादों के सहारे साथ बिताए संग जो पल तुम्हारे रख लूं तब संजोकर इस पल को क्या पता पल कल हो की ना हो कल शायद रहें या की न रहें हम न जाने जाए किस पथ ये जीवन हो हर पथ बस संग यादें तुम्हारी साथ रहे सदा बस चाहत तुम्हारी

नृत्य

यूं तेरा लहरों सा लहराना यूं तेरे कमर का बलखाना यूं लहराती ज़ुल्फ़ तुम्हारी नृत्य में कितनी सुंदर नारी नृत्य मंडली की शोभा तुम देख तुम्हें मैं हो जाता गुम आत्म बल अद्भुत तुम्हारा नर्तन क्रिया ने मन लुभाया चेहरे पर विचित्र मुस्कुराहट है देती मेरे हृदय पर आहट आनंदित ऐसे सदा रहो तुम तुझे छू न पाए कोई भी ग़म अठखेलियां तेरी परिचायक जीवन, नृत्य में लाभदायक लहराए यूं हरपल खुशियां निरावृत हो तुम्हारी दुनियां

तुम आई

तुम आई, रौशन हुई जिंदगी तुम आई, साथ लेकर खुशी तुम आई, पल रुक सा गया तुम आई, सब थम सा गया काश, कुछ ज्यादा पल होते काश, नहीं कोई बंधन रहता काश, मिलन कुछ ऐसा होता काश, संग केवल दोनों होते तुमको, लेकर जाता गंगा तट तुमको, गर्म सी चाय पिलाता तुमको, देखता रहता एकटक तुमको, लाता घर की चौखट साथ में, हम सब बात बताते साथ में, बैठ हंसते मुस्कुराते साथ में, ले गर्म समोसे खाते साथ में, एकदूजे में डूब जाते पर, कुछ भी ऐसा हो न सका पर, है अभी शायद वक्त बाकी पर, क्या फिर हम मिल पाएंगे पर, क्या मधुर मिलन भी होगा तुम आई, सपने जाग उठे फिर तुम आई, आई बचपन की यादें तुम आई, तुम बिल्कुल वैसी हो तुम आई, दिल में केवल तुम हो

बेवफ़ाई

तेरी बेवफ़ाई थी कबूल मुझे पर बेहयाई सोची न थी मैंने आने का था न इंतज़ार मुझे नहीं मंज़ूर था तुम्हारा जाना मेरे क़रीब तुम ख़ुद आई थी मन में सोच मेरी रुसवाई थी हर सितम ढ़ाया मुझपर तूने फ़रेब हीं तो तेरी सच्चाई थी खुदगर्ज़ी की मिसाल हो तुम तुझ से सीखे कोई दग़ा देना कैसे तोड़ें ये दिल किसी का  सच ये कि बेमिसाल हो तुम समझा तुझे पर अंजान रहा यक़ी की वज़ह से नादाँ रहा मन को ये इल्म तू ऐसी नहीं यकीं की क़ीमत चुकाई मैंने

सफ़र

होता दिल पर असर जैसा भी रहता सफ़र राह हर्ष पीड़ा का मेला बढ़ता जा राही अकेला पथ मिलेंगे कई तरह के ये देख तू इनमें न भटके मोड़ बहुत से आएंगे किंतु मुड़ना तुम देख समझ कर रास्ते ये आराम भी देगें रास्तों में कष्ट भी होगा रुक न जाना थम न जाना बढ़ते हुए मंजिल को पाना

मेरी क्या औकात है

मैं नहीं बदला ये हालात बदले हैं मैं तो वैसा हीं बदलूं, नामुमकिन तेरा साथ है छूटा मेरा विश्वास है टूटा बदल गई हो तुम असोचनीय ये दिन जब हांथ थामा था तब साथ में थी तुम ज़रूरत नहीं अब तो तुम हो गई हो गुम तेरा रिश्ता होता सोचकर  मेरा रिश्ता बेपरवाह तेरा मायूस चेहरा देखकर मैं तेरे साथ आया था सब कुछ सहा कुछ न कहा तेरे साथ रहा बातें थी बनीं बहुत हुई बदनामी तेरे नाम से जब नाम मेरा जुड़ गया पर वैसे भी माहौल में उस वक्त मैं तेरे साथ था क्या तेरे मन में था न तब पढ़ा न अब पढूं ये नामुमकिन मेरे लिए  तुझको मैं समझ सकूं पहले कोई और था फिर और कोई आ गया फिर मेरी क्या जरूरत तुम्हें कोई और जब रास्ता मिला जब भी दिल तेरा था टूटा जब भी तुम अकेली थी जब भी मेरा साथ मांगा तेरे संग हीं मेरी हथेली थी कभी छाया तेरा मैं रहा कोई और छाया आ गया फिर मैं भला किस काम का मेरा रिश्ता भला किस काम का तुम सोचोगी खिलौना सा मुझको इस्तेमाल किया मैं जानता था कभी लेकिन महसूस न खुद को होने दिया ये जानकर दिल टूटेगा ये साथ तुम्हारा छूटेगा मैं साथ तेरे रहा सदैव न आशा थी तू बदलेगी खेलना भावनाओं से शायद सदैव यह स्वभाव तुम्हारा ...