बेवफ़ाई
तेरी बेवफ़ाई थी कबूल मुझे
पर बेहयाई सोची न थी मैंने
आने का था न इंतज़ार मुझे
नहीं मंज़ूर था तुम्हारा जाना
मेरे क़रीब तुम ख़ुद आई थी
मन में सोच मेरी रुसवाई थी
हर सितम ढ़ाया मुझपर तूने
फ़रेब हीं तो तेरी सच्चाई थी
खुदगर्ज़ी की मिसाल हो तुम
तुझ से सीखे कोई दग़ा देना
कैसे तोड़ें ये दिल किसी का
सच ये कि बेमिसाल हो तुम
समझा तुझे पर अंजान रहा
यक़ी की वज़ह से नादाँ रहा
मन को ये इल्म तू ऐसी नहीं
यकीं की क़ीमत चुकाई मैंने
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