Posts

हाँ वहीं हिंदुत्व है

हाँ वहीं हिंदुत्व है NAVNEET ।।  हाँ वहीं हिंदुत्व है   ।। अडिग पर्वत हिमालय सा जिसका अस्तित्व है न हिला सका कोई जिसे हाँ वहीं हिंदुत्व है कितने आए दहशतगर्दी कितनों ने कितनी चेष्टा की शाब्दिक अर्थ बदलने को छल किया चाल रची पर अंगद पाँव सा डटा रहा हिंदुत्व की अपनी रौशनी चंद चालबाजों के दुष्कर्म से बिगड़ेगा इसका कुछ नहीं परिपूर्ण सेवा भाव से इसने सबको अपनाया है वसुधैव कुटुम्बकम का दिया सबक हिदुत्व तो जग का साया है   - नवनीत

श्री राम अयोध्या आ रहे

श्री राम अयोध्या आ रहे NAVNEET ।।  श्री राम अयोध्या आ रहे   ।। जीवन में भी वनवास था पर जन जन में विश्वास था धर्म मार्ग पर चल अडिग श्री राम अयोध्या आएंगें   स्थान पुनः हैं पा रहे देर हुई तो क्या भला भक्तों की ये परीक्षा थी श्री राम अयोध्या आ रहे   हर्ष को मत छिपने देना दिवाली सा परिवेश रहे तुम अपनी भक्ति में मगन रहो औरों में चाहे क्लेश रहे   सौगंध तुम्हें श्री राम की बस प्रेम भाव ही रखना तुम चाहे कोई कहे कुछ भी पर भक्ति से न भटकना तुम   फिर क्यों तोड़ें विश्वास को हम जब कण कण में श्री राम हैं फिर क्यों करें हम मन विचलित जब तन मन में श्री राम हैं   पावन अयोध्या धाम को साष्टांग हमारा प्रणाम है प्राँगण में आपके मंदिर जो दर्शन पाना अब काम है - नवनीत    

भटकते मज़दूर

भटकते मज़दूर  NAVNEET ।।   भटकते मज़दूर     ।। देख के कष्ट आम जनों का मन मेरा विचलित होता है जिनके पास न रोटी है वो रात में कैसे सोता है छिन गई है रोज़ी जिनकी पास न है कुछ खाने को जाना चाहें अपने घर वो साधन नहीं पर जाने को समस्त परिवार टूट गया है महामारी की बेचैनी में सूझ रहा नहीं अब कुछ भी आगे रखा क्या जीवन में दुःखों का पहाड़ है टूटा कष्टमय उनका जीवन है पर कुछ कर्म-जनों के कारण जीवन में उनके उजाला है इंसानियत का कर्म जो करते कर्म को ही धर्म समझते ऐसे कुछ लोगों के कारण भूखे न कुछ लोग हैं सोते तन मन धन सब अर्पण है ईश्वर के इंसांनों पर दिन रात और चारों पहर जो ज़िंदा हैं बस कर्मों पर - नवनीत

त्याग

त्याग NAVNEET ।।   त्याग    ।। आपके इस त्याग को देश का प्रणाम है आपने हमारे लिए त्यागे अपने प्राण हैं मिलता क्या किसी को भला किसी के प्राण लेकर इंसानियत को हुआ है क्या क्यों गिर गए हैं इस कदर बहुत हुआ, अब त्याग दो छोड़ दो विनाश को प्रेम नहीं हो सकता तो नफरत भी तो मत करो धर्म मानो इंसानियत को और क्या रखा भला - नवनीत

खून सभी का खौला है

खून सभी का खौला है  NAVNEET ।। खून सभी का खौला है  ।। खून सभी का खौला है ये वक़्त अभी कुछ ऐसा है बदलें हैं अब सब मायने अब फिर से ह्रदय में क्रांति है वो दुश्मन जो की सीमा पर कल सीना ताने रहता था अब काँप रहा है वो थर्र थर्र अब जवाब मिला उसे हर पल हम शांति के परिचायक हैं हम अपनेपन के नायक हैं हाँ हमको प्यारी इंसानियत पर छेड़ोगे तो न छोड़ेंगें ये धरती है श्री राम की श्री कृष्ण गौतम बुद्ध की गुरु नानक जी गुरु गोविन्द जी ये आकलन सबका जानती है जब शांत हैं तब शांत हैं जब उठ जाएँ तब क्रांति है अब निकाल दो अपने मन से भारत के विषय में जो भ्रान्ति है जब सहते थे न कहते थे अब वक़्त है बदला जान लो - नवनीत

मज़दूर

मज़दूर  NAVNEET ।। मज़दूर  ।। गांव की वो गलियां, वो छोटी सी दुनियाँ, वो पेड़ों की छाँव, जहाँ पर हम खेले। वो छूटे सभी, रोज़ी रोटी के कारण, एक मजदुर का रूप, किया हमने धारण। चले फिर शहर को, लिए मन में सपने, थी बस एक आशा, छूटे सारे अपने। नए सपने सजाने, नई दुनियाँ बसाने, लिए कामना यह, चले हम निभाने। न था काम, न रोटी, न कोई ठिकाना, बड़ी मिन्नतें की, किए कई जतन फिर। जीने को जीवन, मिला एक बहाना, मिली रोज़ी रोटी, मिला फिर ठिकाना। सुबह की वो पहली, किरण से भी पहले, हम उठते हैं सो कर, थकावट भी रहती। वो पिछले दिनों की, थकावट जो अपनी, वो अगले दिनों तक, भी रहती है संग में। हमारी ही मेहनत, का है यह फल की, सभी को है मिलती, वो सारी सुविधाएँ। महल वो जो प्यारे, वो खाने की चीज़ें, वो जग के सभी सुख, में युक्त दुःख हमारा। हमारे पसीने, लहू है हमारा, नहीं चाहिए पर, हमें कुछ भी ज़्यादा। बस थोड़े से आदर से, हमको भी देखें, हमें मूल सुख दें, हमें दें प्रतिष्ठा। हमारे भी बारे में, आप कुछ तो सोचें, हमारे ही मेहनत से, हर सुख हर सुविधा। - नवनीत

सोच का सम्मान करें

सोच का सम्मान करें NAVNEET ।। सोच का सम्मान करें  ।। आवश्यक है की शब्दों की मर्यादा रखें आवश्यक है की मन की बात कहें परन्तु एक सीमा रखें हर पक्ष के लोग इस बात पर अमल करें हर सोच के लोग इस राह पर चलें मिलता क्या है किसी का अनादर कर के पाते क्या हैं किसी का उपहास करके हर इंसान की है अपनी एक सोच उस सोच का सम्मान करें न उसका अनादर करें बात सत्य की है बात सब की है इंसानों में आपस में प्रेम हो इसी में भलाई सबकी है घृणा फैलाना नहीं सच से पर घबराना नहीं जो सत्य है वो मिलेगा खुशियों का पुष्प खिलेगा मगर देखना, देश को नुकसान न हो मगर देखना, इंसानियत बदनाम न हो दायरे में रह कर मांगेगे हम अपने हक़ को मानेंगे - नवनीत