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Showing posts from October, 2024

चमक

चमक चेहरे की कुछ पल चमक मन का युगों का है चमकती आँखें कहती यह किया कुछ तुमनें आकर्षक रहें साथ मिलकर सब करें चिंता एक दूजे की चमकाएं साथ में भविष्य चमक चेहरे पर सबके हों आभा फैले दुनियां में घृणा हो दूर दुनियां से रहे इंसानियत ही सबमें चमके संसार सब चमकें

अहंकार

हर गली हर मोड़ में मचा है चीत्कार क्यों इंसानों में भरा हुआ इतना अहंकार क्यों अंश हम एक ईश्वर के पल भर का यह डेरा है रहें साथ सारे प्रेमपूर्वक क्या तेरा है क्या मेरा है अभिमान हो किस बात का सब कुछ यहीं पर रह जाना अपनेपन से ही रहें हर कोई बस कुछ दिन ये है ठिकाना कर्म ऐसा सब करें रहे याद केवल नाम अहंकार अभिमान का रहे भला क्या हीं काम

लाल रंग

जीवन में सुंदर ढाल रंग आकर्षक लगे लाल रंग सुहाग झलके नारी का शोभा निखारे लाल रंग पाँव शोभित महावर लाल अधोभाग में सोलह श्रृंगार द्योतक समृद्धि सौभाग्य का अटूट राधा कृष्ण के प्रेम सा भुजाओं में जो कंगन लाल बाहु का खूबसूरत अलंकार साहस निडरता सह प्रेम संग चिरस्थायी सम्बन्ध का श्रृंगार शोभित ग्रीवा माल्य लाल समर्पित ईश्वर को श्रृंगार शुभ फलदायी शांत मंगल संपूर्ण जीवन रहे सुमंगल कुमकुम लाल ललाट पर लालिमा ज्यों आदित्य सा कुमकुम छठा त्रिनेत्र चक्र संपन्नता स्वयं मां लक्ष्मी का है सिंदूर लाल से शोभे मांग उमा संग उमानाथ सर्वांग अखंड सौभाग्यवती वरदान है सिंदूर में जैसे बसता प्राण शीतलता की छांव में यूं ऐसे हीं संभाल रंग सदैव जीवन में यूं हीं खिलता रहे लाल रंग

आनंद

ये जिंदगी स्वछंद हो आनंद ही आनंद हो स्वतंत्रता में सब जिएं मधुर पेय हीं सब पिएं यहां वहां इधर उधर टहला करें बिना डर दिन हो या की रात हो बस आनंद ही साथ हो व्यतीत सबका जीवन यूं हर्षित वर्तमान भविष्य हो कठिनाइयों में सभी साथ हो सहजता में सबका हाथ समय ऐसा आए जो हरेक इंसान साथ हो रहे नहीं कोई अभाव ऐसा बस रहे प्रभाव

मेरे पिया

हूं प्रेयसी तुम्हारी पिया मैं तुम बसे हो हमरे जिया में आकाश तू मैं बादल पिया तू मन मेरा मैं हूं तेरी हिया चाहती हूँ की न रहे अब दुरी चाहती हूँ न रहे कोई मज़बूरी चाहती हूँ बस तुम्हारा दामन चाहती हूँ अब रहूँ तेरे आँगन चाहती तू मेरे सुख में संग हो चाहती मैं दुःख तुम्हारा बाटूँ  चाहती संग रहूँ तुम्हारे हरदम चाहती हूँ बनाना तुम्हें हमदम चाहत है मेरी बस इतनी सी चाहत न की हो सोना चाँदी तू ही तो बन रहे मेरा गहना पहनूँ तुम्हें बना के मैं कँगना है यह चाह मेरी मुस्कुराए तू मेरे संग बस खुशियां पाए तू रहे न तुझे कभी कोई अभाव  हो कोई राह तेरी मैं रहूं पड़ाव तेरी सांस में बस मेरा नाम हो साथ अपना रहे ज्यों धाम हो तुम राम मेरे मैं सीता तुम्हारी पुष्पों से लदी रहे अपनी क्यारी