अहंकार
हर गली हर मोड़ में
मचा है चीत्कार क्यों
इंसानों में भरा हुआ
इतना अहंकार क्यों
अंश हम एक ईश्वर के
पल भर का यह डेरा है
रहें साथ सारे प्रेमपूर्वक
क्या तेरा है क्या मेरा है
अभिमान हो किस बात का
सब कुछ यहीं पर रह जाना
अपनेपन से ही रहें हर कोई
बस कुछ दिन ये है ठिकाना
कर्म ऐसा सब करें
रहे याद केवल नाम
अहंकार अभिमान का
रहे भला क्या हीं काम
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