मेरे पिया

हूं प्रेयसी तुम्हारी पिया मैं
तुम बसे हो हमरे जिया में
आकाश तू मैं बादल पिया
तू मन मेरा मैं हूं तेरी हिया

चाहती हूँ की न रहे अब दुरी
चाहती हूँ न रहे कोई मज़बूरी
चाहती हूँ बस तुम्हारा दामन
चाहती हूँ अब रहूँ तेरे आँगन

चाहती तू मेरे सुख में संग हो
चाहती मैं दुःख तुम्हारा बाटूँ 
चाहती संग रहूँ तुम्हारे हरदम
चाहती हूँ बनाना तुम्हें हमदम

चाहत है मेरी बस इतनी सी
चाहत न की हो सोना चाँदी
तू ही तो बन रहे मेरा गहना
पहनूँ तुम्हें बना के मैं कँगना

है यह चाह मेरी मुस्कुराए तू
मेरे संग बस खुशियां पाए तू
रहे न तुझे कभी कोई अभाव 
हो कोई राह तेरी मैं रहूं पड़ाव

तेरी सांस में बस मेरा नाम हो
साथ अपना रहे ज्यों धाम हो
तुम राम मेरे मैं सीता तुम्हारी
पुष्पों से लदी रहे अपनी क्यारी

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