सुनो कृष्ण, तुम बाल रूप में आना मैं आऊंगा तब बनकर, तेरा सुदामा नटखट हम वृंदावन के उस प्रांगण में तब पुनः जीएंगे जीवन हम मधुबन में यमुना का तीर, जहां वृक्ष कदम का होगा गोपियों संग कान्हा हम अटखेलियाँ करेंगें चुपचाप व्यतीत कर वक्त चला जाऊंगा तेरे जीवन में व्यर्थ न कभी आऊंगा हे माधव तुम युवक रूप में आना अक्रूर सा मुझमें तुम सहोदर पाना मथुरा लेकर तब तुमको मैं जाऊंगा कंसों से मुक्ति सबको दिलवाऊंगा संदेशवाहक बन हस्तिनापुर जाऊंगा लेकर समाचार पांडवों का मैं आऊंगा स्यमंतक मणि जो पास मेरे हे कान्हा द्वारका में तब सुख समृद्धि मैं लाऊंगा तुम कुरुक्षेत्र के रण में जब जाओगे अर्जुन रूप में मुझको तुम पाओगे तुमको गुरु मैं स्वयं को शिष्य मानूंगा तेरे बताए राह को हीं कर्म जानूंगा तुम हांथ पकड़ मुझे मार्ग सही दिखलाना सत्य धर्म के रास्ते मुझको प्रभु ले जाना न भटकूं मैं तुम साथ में रखना मुझको हर हाल में तेरा साथ रहे बस मोहन सात्यकि सम मैं दूत रहूंगा तेरा मुझमें पाओगे तुम नारायणी सेना मैं छोड़ तुम्हारा साथ नहीं जाऊंगा कौरव कितने भी हों मुझे पाओगे तुम हो अर्जुन के मैं नाथ सारथी तेरा न छूटेगा जन्मोजन्म सा...