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Showing posts from November, 2022

आप

आप वो दिनकर हो जिसने प्रभा दी हमें आप वो प्रभा हो जिसने हमें मार्ग दिखाया आप वो मार्ग हो जिससे लक्ष्य पाई हमनें आप वो लक्ष्य हो पहुंच जहां मन हर्षाया आपने सदा थाम अंगुल राहों को सुगम किया आपने द्रोणाचार्य सा अर्जुनों को बल दिया आपकी पहचान है सुदृढ़ता सुधीरता जटिलताओं में, तिमिर में विश्वास दिया रजनीकांत सा

शतरंज

युद्ध वो निर्णायक था अद्वितीय हर नायक था नभ और धरा थमी न योद्धाओं की कमी शतरंज सी चालें कईं चक्रव्यूह कितनें बनें थे योद्धाओं ने नियम थे तोड़े शूरवीर कई मोहरे बने थे मंत्री की बातों से ऐंठा राजा मूंद आंख था बैठा घोड़े हांथी ऊंट लड़े थे प्यादे मैदां में बिखरे थे

सुनो कृष्ण....

सुनो कृष्ण, तुम बाल रूप में आना मैं आऊंगा तब बनकर, तेरा सुदामा नटखट हम वृंदावन के उस प्रांगण में तब पुनः जीएंगे जीवन हम मधुबन में यमुना का तीर, जहां वृक्ष कदम का होगा गोपियों संग कान्हा हम अटखेलियाँ करेंगें चुपचाप व्यतीत कर वक्त चला जाऊंगा तेरे जीवन में व्यर्थ न कभी आऊंगा हे माधव तुम युवक रूप में आना अक्रूर सा मुझमें तुम सहोदर पाना मथुरा लेकर तब तुमको मैं जाऊंगा कंसों से मुक्ति सबको दिलवाऊंगा संदेशवाहक बन हस्तिनापुर जाऊंगा लेकर समाचार पांडवों का मैं आऊंगा स्यमंतक मणि जो पास मेरे हे कान्हा द्वारका में तब सुख समृद्धि  मैं लाऊंगा तुम कुरुक्षेत्र के रण में जब जाओगे अर्जुन रूप में मुझको तुम पाओगे तुमको गुरु मैं स्वयं को शिष्य मानूंगा तेरे बताए राह को हीं कर्म जानूंगा तुम हांथ पकड़ मुझे मार्ग सही दिखलाना सत्य धर्म के रास्ते मुझको प्रभु ले जाना न भटकूं मैं तुम साथ में रखना मुझको हर हाल में तेरा साथ रहे बस मोहन सात्यकि सम मैं दूत रहूंगा तेरा मुझमें पाओगे तुम नारायणी सेना मैं छोड़ तुम्हारा साथ नहीं जाऊंगा कौरव कितने भी हों मुझे पाओगे तुम हो अर्जुन के मैं नाथ सारथी तेरा न छूटेगा जन्मोजन्म सा...

हासिल

कभी कुछ चाहकर भी तो कुछ हासिल नहीं होता मंजिल कभी छूट जाती है राह कभी सुगम नहीं होता कभी जो दिल ये चाहे वो किस्मत लेने नहीं देती कभी किस्मत का साथ जो ये दिल तब दूर रहता है कशमकश साथ रहती है विश्वास हो जो तो भी क्या बहुत सी बातें जो ऐसी हैं हमारे पहुंच से बाहर वो मगर ऐसा हीं जीवन है मगर ये हीं तो सच्चाई अगर तुम हार मानोगे रहेगी साथ बस रुसवाई तो चलना है तो बढ़ना है हां सब कुछ भूलकर आगे न मेहनत व्यर्थ ये जाएगी हृदय से पिरोए हैं जो ये धागे

निश्चल

चाहे जानें तुझको हीं क्यों प्रेम मेरा यह निश्चल सा बहता है यादों में तेरी जीवन धारा में अविरल सा विश्वास अटूट आशाएं गहरीं बन जाओ मेरी खुशियों के प्रहरी देना साथ ज्यों चांद चांदनी जीवन का मेरे बन रौशनी अंधकार को यूं हीं तुम हरना कदम मिला कर साथ चलना हांथ पकड़ आभास तुम देना हारूं अगर विश्वास तुम देना तुम बन रहना मेरा साया रूह तुम, मैं तो बस काया हो तुम मेरे जीवन को आशा साथ तुम जो क्या हो निराशा