हासिल
कभी कुछ चाहकर भी तो
कुछ हासिल नहीं होता
मंजिल कभी छूट जाती है
राह कभी सुगम नहीं होता
कभी जो दिल ये चाहे वो
किस्मत लेने नहीं देती
कभी किस्मत का साथ जो
ये दिल तब दूर रहता है
कशमकश साथ रहती है
विश्वास हो जो तो भी क्या
बहुत सी बातें जो ऐसी हैं
हमारे पहुंच से बाहर वो
मगर ऐसा हीं जीवन है
मगर ये हीं तो सच्चाई
अगर तुम हार मानोगे
रहेगी साथ बस रुसवाई
तो चलना है तो बढ़ना है
हां सब कुछ भूलकर आगे
न मेहनत व्यर्थ ये जाएगी
हृदय से पिरोए हैं जो ये धागे
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