शतरंज
युद्ध वो निर्णायक था
अद्वितीय हर नायक था
नभ और धरा थमी
न योद्धाओं की कमी
शतरंज सी चालें कईं
चक्रव्यूह कितनें बनें थे
योद्धाओं ने नियम थे तोड़े
शूरवीर कई मोहरे बने थे
मंत्री की बातों से ऐंठा
राजा मूंद आंख था बैठा
घोड़े हांथी ऊंट लड़े थे
प्यादे मैदां में बिखरे थे
Comments
Post a Comment