नवीन
हैं हर्ष –विषाद संग संग
जीवन का बस यही रंग
नवीन हर एक सुबह है
हरेक संध्या बीते अंतरंग
विस्तार होगा गगन का
वसुधा में होगी हरियाली
निरंतर सीखते चलो तुम
निश्चय फैले वृक्ष की डाली
नई सोच से ही हमेशा
नया होगा तेरा जीवन
सम्मुख बढ़ते चलो तुम
अतीत से सीख हरदम
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