फिर कभी... नहीं कभी

अभी तो आरंभ है, यह आत्मा स्वतंत्र है
करेंगे बात बैठकर, कहानियां फिर कभी
साथ में उमंग हो, आत्मविश्वास प्रचंड हो
पराजय विजय की, निशानियां फिर कभी

देना अभी तो साथ बस, बढ़ाना विश्वास को
अभी न यह सोचना, की देगा क्या साथ वो
कदम अभी तो साथ है, हर क्षण उत्साह भी
इंसान के सच्चाई की, कहानियां फिर कभी

थमे हीं नहीं थे पग मेरे, टूटे नहीं वचन कभी
कठिनाइयां आती रहीं, साथ डगमगाती रही
इस मोड़, उस मोड़ पर, यहां वहां, इधर उधर
जो जैसा वो वैसा हीं, जानना उन्हें फिर कभी

ये पल बीत जाएगा, सिखा कुछ यह जाएगा
सीखना या भूलना, समझना या अंजान बस
नियत क्या नियति, क्या सोच, कैसी जिंदगी
मन में सब समेटकर, कहूंगा कुछ नहीं कभी

व्यवहार एवम उदारता, हर वक्त को संभालता
मूल्य कोई समझे नहीं, विद्वेष हीं क्यों लगे सही
जाना बस ये सीखकर, है छल कपट वास्तविक
परिवर्तन रही पहचान नहीं, बदलूंगा मैं नहीं कभी

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