क़िताब

जीवन के बीते पल
लिखा चुकी क़िताब
बदलाव असंभव
आगे क्या व्यवहार

भविष्य के पल
आने वाला कल
सूख गए पन्ने जो
सीख, नवजीवन दो

बीता उसको बिसार दो
क़िताब को निखार दो
कर्म करो ऐसा कुछ
पुनः वो पन्ने संवार दो

जो थे इत उत बिखरे
इधर उधर वो टुकड़े
समेटो सबको साथ
लिखो कोई किताब

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