सोच

नकारात्मकता को तुम रोक नहीं सकते
नकारात्मक व्यक्ति को टोक नहीं सकते
नहीं बदल सकते हो जब सोच तुम उनकी
सोचना क्या भला, करें वो अपने मन की

अपनी बात रखने से हिचकिचाना मत
अपनी शक्ति कहीं भूल तुम जाना मत
भाग्य में लिखा कोई छीन नहीं सकता
कर्म जो तुम्हारे वहीं परिचायक हैं रहते

संसार चलता है दोपहिए के सामान
नदी के दो तट कभी एक नहीं होते
चमकते तो हैं सदा चांद भी सूर्य भी
सूर्य सदा उज्ज्वल, चांद चांदनी रात

कोई टांग ना खींचे तो जीवन जीवन क्या
कोई आंख ना मीचे तो तेरी उपलब्धि क्या
मत हताश होना तुम औरों के कर्म से
कर्म करते जाना सदैव अपना धर्म से

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