रोटी
नहीं चाहिए मुझको कपड़े
मार धार पिटाई दंगे लफड़े
घृणा द्वेष का ये स्थान नहीं
दे दो मुझे एक पल की रोटी
चेहरे पर यह डर नहीं दो
लंबी उम्र का वर नहीं दो
आशीर्वाद में दे दो खाना
नहीं चाहिए मुझे ठिकाना
कृपा बस इतनी कर दो
मुस्कान से चेहरा भर दो
आंखों में मेरी ज्योति दो
मुझे एक पल की रोटी दो
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