हमारी अधूरी कहानी

जुबां पर नाम चीज़ क्या
जब दिल में बसे हो तुम
तुझसे हो इंतकाम क्या
जब लगते अपने हो तुम

कभी कुछ मजबूरी होती है
तब हीं कभी यूं दूरी होती है
दूरियां भी तो अच्छी बात है
पुनः मिलन एक जज़्बात है

एक पल भी तुम्हें
मैं भूल न पाता हूं
सोचूं तुम्हारे बारे में
पर कह न पाता हूं

तुम यूं मेरी यादों में
बसे हो हर एक पल
आज भी सोचता हूं
सोचता था तुम्हें कल

उम्र के उस पड़ाव में
बैठें हैं अभी हम तुम
क्या ये होना जायज़
या कहीं हमारी भूल

पर ये भी सोचता हूं
जो भी है, अच्छा है
चाहना एक दुजे को
नहीं कोई खता है

दुआ है ये तुमसे मिलूं
जो कह न पाया, कहूं
मन की बातें सारी कह दूं
मन की बातें सारी सुन लूं

सच है, प्रेम की उम्र नहीं होती
भावनाओं का क्या, उमर पड़ती
कुछ ख्वाब जो अधूरे हैं रह जाते
समय के साथ उनकी पूर्ति होती

कुछ खो जाते जो जीवन की राहों में
पुनः आ जाते हैं हमारी हीं पनाहों में 
अपना मिलना भी शायद लिखा था
ये कोई करिश्मा शायद उस खुदा का

बस एक दूजे को गलत न समझना 
ये नियति है, न की हमारा भटकना
और जीवन में जो कुछ भी होता है
अच्छे के लिए हीं होता, ये भरोसा है

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