बारिश की वो बूंदें
आईं कुछ बूंदें बारिश की
हम तुम जब मिलने वाले थे
आ न सकी तुम पास मेरे
ये बारिश है, या की दुश्मन
वादा था हमको है मिलना
कुछ कहना, कुछ है सुनना
बातें कुछ मन की कहनी थीं
भावनाओं से भरे समुंदर थे
थमनें का उसने न नाम लिया
बरस पड़ी और जी भर कर
किसी राह में तुम्हें रोक लिया
इंतजार हीं बस हम करते रहे
वादा था हमको था मिलना
कुछ कहना, कुछ था सुनना
कुछ बातें मन की कहनी थीं
भावनाओं से भरे समुंदर थे
आएगा फिर दिन नया सा
फिर तुम मिलने आओगी
फिर होंगी बातें जी भर कर
फिर तुझमें हम खो जाएंगे
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