शासक-सैनिक
शासक संधि हैं करते
सैनिक हैं रक्त बहाते
संधि तब क्यों न होती
जब न शस्त्र उठाए जाते
सैनिक का पूर्ण जीवन तो
शासक का बंधक सा हीं
शासक भला दर्द क्या जाने
सैनिक तो बेबाक आज्ञा माने
बस सीमा पर डटना जानें
और सेवा को धर्म हैं मानें
होती क्या बातें कदाचित
इन बातों से न चिंतित
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