स्त्री

सृस्टि की जननी

अर्धनारीश्वर से जन्मी

विश्व में प्रेम अपनापन हेतु

स्वयं ईश्वर की परिकल्पना


स्त्री समाज में

दृढ़ता की परिचायक

दृढ़ ह्रदय, सहनशीलता

हर क्षण में गंभीरता 


सोच में गहराई

विश्व की ये नायक

सम्मान में निःशब्द हूँ

देवियाँ हैं, क्या कहूँ

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