घाट की सीढ़ियों पर....
बैठकर माँ गंगा किनारे
शाँत लहरों के बीच
घाट की सीढ़ियों पर
प्रायः सोचता हूँ मैं
क्यों जानी जाती है काशी
बात क्या है बनारस में
क्यों विशेष है वाराणसी
क्या है इसकी चौखट में
मन यहाँ होता पवित्र
आभाष साक्षात् शिव का
प्रसन्नता का भाव होता
अनुभूति होती बैकुंठ सी
भक्ति हर ओर है दिखती
साधु सन्यासी बसते यहाँ
हर हर महादेव शब्द से
वातावरण गूँजता हुआ
घाटों मंदिरों की अल्पता नहीं
घर घर में शिवलिंग रखा
वैदिक मन्त्रों से सदा
नगर ये प्रतिध्वनित रहा
काशी तो स्वयं विश्वास
शोध ये जीवन का
भावनाओं से परिपूर्ण
कण कण है काशी का
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