सिखाएगा कोई क्या

सिखाएगा कोई क्या

NAVNEET


।। सिखाएगा कोई क्या ।।


मिलता क्या उपहास से

धर्म प्रथा के परिहास से

दर्शाती आपकी मानसिकता

निर्बलता है यह, क्षीर्णता


हाँ पूजते हम गाय को

गौ मूत्र का उपयोग भी

हाँ मानते माता उन्हें

लीपते गोबर से आँगन भी


हम भक्त हैं भगवान के

ये भक्ति क्यों है चुभती

इस शब्द से घृणा है क्यों

चेष्टा क्यों अर्थ बदलने की


हाँ राष्ट्र से अपने प्रेम है

वसुधैव कुटुंबकम अपनी देन है

सहनशीलता पहचान है

धर्मनिरपेक्षता सदा से शान है


ये धरती है श्री राम की

गौतम बुद्ध गुरु नानक जी

तीर्थंकर महावीर की

न जाने कितने पीर की


सिखाएगा कोई क्या उन्हें

सिखाया जिसने विश्व को

घृणा धरी रह जाएगी

पहचानिए भूतकाल भविष्य को


- नवनीत 

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