बदल गई सोंच

बदल गई सोंच


NAVNEET

।। बदल गई सोंच ।।


देखो कुछ गिद्ध निकले हैं

नोंच नोंच सब खाने को

मानवता को भूल बैठे

साम्राज्य अपना बनानें को


हर बात की बात अलग हुई

हर सोंच की सोंच अलग हुई

विरोध भी है कार्यसूची सी

सिद्धांता स्वरुप बस मतलब सा


दुर्घटनाओं पर भी राजनीती

हो गई कैसी प्रवृति

नारी का सम्मान गया

हर त्रासदी है अब बँट चुकी


- नवनीत 

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