बेटी

बेटी

NAVNEET


।। 
बेटी ।।


जनक-जननी का अभिन्न अंग

बेटियाँ भगवान सी हैं

हर अभिभावक के लिए

बेटियाँ अभिमान सी हैं


माता-पिता की सम्मान हैं बेटी

आयुपर्यंत उनकी पहचान है बेटी

सुता तो स्वयं ईश्वर का स्वरुप

आजीवन संग छाँव हो या धुप


तनया तात का लगाव अनूठा

बेटियों के उड़ान की दृढ़ ढाल पिता

होती हैं बेटियाँ जनक की दुलारी

पापा की परी घर की प्यारी


माँ लक्ष्मी की आकृति है बेटी

समस्त देवियों की प्रकृति है बेटी

आँगन में आए खुशियों का मौसम

खेलें जो बेटी हर्षित हो मन


- नवनीत



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