तेरी मित्रता
तुम इतनी अच्छी जो हो,
तुम इतनी प्यारी जो हो।
मन है तेरा कितना सुंदर,
सुंदरता की हो तुम सागर।
तुझे जैसा पहले देखा था,
अभी भी तुम वैसी हीं हो।
बदली होगी औरों के लिए,
मेरे लिए बिल्कुल वैसी हो।
तुझमें अपनापन दिखता है,
सुकून सा जीवन दिखता है।
सब मैं कह सकता हूं तुझसे,
मन में जो बात समझती ऐसे।
तुम सदैव बस ऐसी हीं रहना,
हो तुम मेरे जीवन का गहना।
मेरी एक अभिन्न मित्र हो तुम,
हो मत जाना मुझसे तुम गुम।
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