वक्त
हर वक्त का कुछ हासिल है
उसमें ये वक्त भी शामिल है
जो ये सोचते हैं वह टूट गया
हर एक भ्रम ही उनका टूटेगा
तुम होगे खिलाड़ी सयाने कोई
तुम्हें लगता होगा, बस मैं हीं हूं
है अभी अभिमान बहुत तुमको
यह क्षणिक घमंड तुम्हारा टूटेगा
जिसका कर्म ही केवल विध्वंस हो
समझे स्वयं को कृष्ण, पर कंस हो
जो यह समझे कि मैं तो अजेय हूँ
हिसाब कर्म का उसपर भी फूटेगा
भले यह राह कठिन पर चलना है
हर कठिनाइयों को तो निगलना है
छांट अंधकार को रौशनी आती है
तप कुंदन सा तू की यह पौ फटेगा
पूर्णतः क्षणभंगुर ये अहंकार उनका
एक दर्पण सम केवल संसार उनका
अभी देख स्वयं को बहुत इठलाते हैं
देखोगे तुम, उनका यह दर्पण टूटेगा
Comments
Post a Comment