केश
ज्यों जगमग नभ में राकेश
हिम से जैसे परिपूर्ण शैलेश
सुंदरता अद्वितीय झलकती
चमकीले ज्यों ये तुम्हारे केश
श्याम वर्ण की जैसे सहचर
स्वेत यथा बुलबुला समंदर
तनिक सुलझे, जरा उलझे
लगते लुभावन तेरे कुन्तल
रमणीयता तेरी करे सुशोभित
केशों की लहरें करें विमोहित
स्याह रंग के संग मेल खाए
विविध वर्ण संग केश प्रवाहित
उसपर तेरा नयन मटकना
उस पर मीठी तेरी मुस्कान
चेहरे संग जंचते हैं कुन्तल
लगे तुझ पर बड़े मनभावन
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