मत कहो तुम, राम आए हैं
सच कहो, क्या राम आए हैं ?
छोड़ हमें पर गए कहाँ वो थे
ह्रदय में हरपल राम रहते हैं
मत कहो तुम, राम आए हैं
देश के हर कण में राम जी
हरेक के जीवन में राम जी
शांत जो स्वभाव सनातन का
हैं शीलता सिखलाए राम जी
तोड़ा गया निलय था उनका
मन की भावनाएं यथावत थीं
एक उनका आलय था नहीं
धाम उनका हर भवन में था
नाम सदा प्रत्येक आँगन में
कर्म उनका हरेक कार्यों में
राम कभी कहीं गए हीं न थे
मत कहो तुम, राम आए हैं
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