शब्द

मन में तो बात बहुत हैं
लेकिन शब्द नहीं आते

शब्द हृदय में छुपके
हैं भावनाएं बन जाते

न कहने से व्यग्रता
कहने से डर लागे

शब्द कठिन बहुत
आए, आकर भागे

शब्द मन की बोली
शब्द हृदय की भाषा

शब्द अधूरे तब तक
उसे लिखा नहीं जाता

शब्दों का जाल फैलाएं
और हर इच्छाएं पाएं

Comments

Popular posts from this blog

चक्रव्यूह

मित्रता

सफ़र