हवस

जब तक वश में रहता मन
संपूर्ण रहता सदैव जीवन
खुशियों का संचार है होता
संतुष्टि का आधार ये होता

हवस बस एक पागलपन
जिस्म की हो या की धन
बेचैन रहता हर पल मन
विषपूर्ण हो जाता जीवन

वश में जब तक हवस
मधुर हो जीवन का रस
जाए हवस जब हो अनियंत्रित
मानवता का अंत हो सुनिश्चित

Comments

Popular posts from this blog

चक्रव्यूह

मित्रता

सफ़र