बाइस्कोप

आया था जो बहुत होप से

देखूं पलट बाइस्कोप को

अच्छा बीता ये भी साल

हर साल एक सा हाल


समय बुरा होता नहीं 

भाग्य का न खेल होता

बीते कैसे वक़्त भला

कर्म से वो मेल होता


सीखते चलें यूँ हीं बढ़ते चलें

रखें राह सदा हीं आनंदित

गिरना संभलना बस नियति

आचरण रखें सदा मर्यादित

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