एक कविता
लिखनी थी मुझे एक कविता
ज्यों बहती हुई कोई सरिता
समय बहुत व्यतीत किया
तब जाकर कोई गीत बना
मन नें मेरे एक गीत रचा
भावनाओं को सींच रखा
कुछ यादों एवं विचारों को
पंक्तियों के बीच रखा
मन फिर भी व्यथित रहा
क्या लोगों को ये भाएगा
क्या मेरी लेखनी है ऐसी
कोई छाप छोड़कर जाएगी
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