प्रेम के बोल

कहना चाहता हूँ, कुछ प्रेम के बोल

ह्रदय के अपने, हर द्वार खोल

सुंदरता तुम्हारी, लगे मुझे अनमोल

कोयल जैसी बोली, जाती रस घोल

स्वभाव तुम्हारा, बहुत मुझे भाता

देखने को तुम्हें, विवश कर जाता

जीवन में होता, खुशियों का संचार

देखता हूँ जब, तुम्हारे चेहरे की मुस्कान

अपने भी ह्रदय के, हर द्वार खोल

समझ ले मेरे, मन की बोल

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