ख्वाब

 ।। ख्वाब ।।


भूल कर मुझको भला

क्या मिलेगा आपको

नींद भूल सकती है क्या

कहिए कभी किसी ख्वाब को


रिश्ता इनका साथ का

आपस में विश्वास का

एक दूजे के बिना

ना होता कोई वास्ता


नींद है तो ख्वाब भी होंगे

ख्वाब है तो नींद भी

नींद और ख्वाब के बिना

होती अधूरी जिंदगी

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